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रविवार, 21 अप्रैल 2013

शब्द-कीर्तन ओर गुरबानी डाउनलोड ओर सुनने की बेहतरीन साइट



इंटरनेट एक ऐसी जगह है जहाँ आपको सब कुछ मिल सकता है ! जो सोचो वो पल भर मे हाजिर हो जाता है, इसी सोच मे डूबे हुए एक दिन सिख संगीत नाम की ऐसी साइट मिली जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ !  

यहाँ पर एक ही क्लिक मे वो सभी शब्द-कीर्तन ओर गुरबानी सुने जा सकते है, जो आप सुनने की सोच रहे होंगे ! 

यहाँ पर आपको धार्मिक, शब्द-कीर्तन, धड़ी वरण, गुरमत विचार, गुर्बानी उचारण ओर लाइव रिकार्डेड प्रोग्राम सुनने व डाउनलोड करने को मिल जाएगे ! 


Dharmik
Shabad Kirtan
Dhadi Vaaran
Gurmat Veechar
Gurbani Uchaaran
Live Recorded


इस साइट पर आप आर्टिस्ट, एलबम, ट्रेक इन तीन तरीक़ो से सर्च कर सकते है ! आप यहाँ से इस साइट पर जा सकते है !
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शनिवार, 12 जनवरी 2013

भजन और आरती की पुस्तकें डाउनलोड करें



तुलसी दास जी की राम चरित मानस:
हनुमान चालीसा:
और चालीसा:

अतिरिक्त साहित्य :
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मंगलवार, 13 नवंबर 2012

भगवान् विश्वकर्मा जी की आरती


पहले इंजीनियर , वास्तुविद ,मिस्त्री .कारीगर - भगवान् विश्वकर्मा

प्राचीन ग्रंथो उपनिषद एवं पुराण आदि का अवलोकन करें तो पायेगें कि आदि काल से ही विश्वकर्मा शिल्पी अपने विशिष्ट ज्ञान एवं विज्ञान के कारण ही न मात्र मानवों अपितु देवगणों द्वारा भी पूजित और वंदित है!

भगवान विश्वकर्मा के आविष्कार एवं निर्माण कोर्यों के सन्दर्भ में इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी आदि का निर्माण इनके द्वारा किया गया है । पुष्पक विमान का निर्माण तथा सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोगी होनेवाले वस्तुएं भी इनके द्वारा ही बनाया गया है । कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशुल और यमराज का कालदण्ड इत्यादि वस्तुओं का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया है । ये "शिल्पशास्त्र" के आविष्कर्ता हैं। पुराणानुसार यह प्रभास वसु के पुत्र हैं। "महाभारत" में इन्हें लावण्यमयी के गर्भ से जन्मा बताया है। विश्वकर्मा रचना के पति हैं। देवताओं के विमान भी विश्वकर्मा बनाते हैं। इन्हें अमर भी कहते हैं। 

"रामायण" के अनुसार विश्वकर्मा ने राक्षसों के लिए लंका की सृष्टि की। सूर्य की पत्नी संज्ञा इन्हीं की पुत्री थी। सूर्य के ताप को संज्ञा सहन नहीं कर सकी, तब विश्वकर्मा ने सूर्य तेज का आठवां अंश काट उससे चक्र, वज्र आदि शस्त्र बनाकर देवताओं को प्रदान किए ! विष्णुपुराण के पहले अंश में विश्वकर्मा को देवताओं का वर्धकी या देव-बढ़ई कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है। यही मान्यता अनेक पुराणों में आई है, जबकि शिल्प के ग्रंथों में वह सृष्टिकर्ता भी कहे गए हैं। स्कंदपुराण में उन्हें देवायतनों का सृष्टा कहा गया है। कहा जाता है कि वह शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ तैयार करने में समर्थ थे।
 
विश्व के सबसे पहले तकनीकी ग्रंथ विश्वकर्मीय ग्रंथ ही माने गए हैं। विश्वकर्मीयम ग्रंथ इनमें बहुत प्राचीन माना गया है, जिसमें न केवल वास्तुविद्या, बल्कि रथादि वाहन व रत्नों पर विमर्श है। विश्वकर्माप्रकाश, जिसे वास्तुतंत्र भी कहा गया है, विश्वकर्मा के मतों का जीवंत ग्रंथ है। इसमें मानव और देववास्तु विद्या को गणित के कई सूत्रों के साथ बताया गया है, ये सब प्रामाणिक और प्रासंगिक हैं। मेवाड़ में लिखे गए अपराजितपृच्छा में अपराजित के प्रश्नों पर विश्वकर्मा द्वारा दिए उत्तर लगभग साढ़े सात हज़ार श्लोकों में दिए गए हैं। संयोग से यह ग्रंथ 239 सूत्रों तक ही मिल पाया है। 
शिल्प संकायो, कारखानो, उधोगों मे भगवान विश्वकर्मा की महत्ता को मानते हुए दीपावली के अगले दिन सभी औजारो के साथ भगवान विश्वकर्मा जी की आरती ओर पूजा की जाती है !


भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
   
भगवान विश्वकर्मा जी की आरती का वीडियो
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श्री गणेशजी की आरती


 जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
जय गणेश...

एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी।
माथे सिन्दूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय...

अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय...

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥ जय...

दीनन की लाज रखो, शम्भु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊँ बलीहारी॥ जय...

श्री गणेशजी की आरती का वीडियो

 
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सोमवार, 12 नवंबर 2012

श्री लक्ष्मी जी की आरती


असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक तथा अंधेरों पर उजालों की छटा बिखेरने वाली हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन पूरे भारतवर्ष में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. इसे रोशनी का पर्व भी कहा जाता है. दीपावली त्यौहार हिन्दुओं के अलावा सिख, बौध तथा जैन धर्म के लोगों द्वारा भी हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है. यूं तो इस महापर्व के पीछे सभी धर्मों की अलग-अलग मान्यताएं हैं, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ में वर्णित कथाओं के अनुसार दीपावली का यह पावन त्यौहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के बाद बनवास के बाद अपने राज्य में वापस लौटने की स्मृति में मनाया जाता है. इस प्रकाशोत्सव को सत्य की जीत व आध्यात्मिक अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है.
 
परम्पराओं का त्यौहार दीपावली में मां लक्ष्मी व गणेश के साथ मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है. चूंकि गणेश पूजन के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए लक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता का पूजन भी किया जाता है और धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है, इसलिए ज्ञान की देवी मां सरस्वती की भी पूजा होती है. इस दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए भक्तों को चाहिए कि वह दो थालों में 6 चौमुखे दीपक को रखें और फिर उन थालों को 26 छोटे-छोटे दीपक से सजाएं.
 
ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता और वह सदा ही अन्न, धन, धान्य व वैभव से संपन्न रहता है. दीपावली का पर्व समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का सन्देश फैलता है !


श्री लक्ष्मी जी की आरती

 ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत 

हर विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता ।
जो को‌ई तुमको ध्यावत, ऋद्घि-सिद्घि धन पाता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

जिस घर में तुम रहती, सब सद्‍गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र ना हो पाता ।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

शुभ-गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोनधि-जाता ।
रत्‍न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो को‌ई जन गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥
 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत 

हर विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ 


श्री लक्ष्मी जी की आरती  का वीडियो


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